बुजुर्ग मरीज को आ रहे थे मिर्गी जैसे दौरे, पेसमेकर से सुधरी स्थिति
भिलाई। लगभग 80 वर्ष की एक बुजुर्ग महिला को पिछले काफी समय से मिर्गी जैसे दौरे पड़ रहे थे। कई जगह दिखाने पर भी कोई विशेष लाभ नहीं मिला। दो सप्ताह पहले उसे हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल के न्यूरोसाइंसेज विभाग में लाया गया। जांच करने पर जो समस्या सामने आई उसने सभी को चौंका दिया।
डॉ नचिकेत दीक्षित ने मरीज की जांच करने के बाद पाया कि यह आम मिर्गी का मामला नहीं है। मिर्गी मस्तिष्क से जुड़ी एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार और अचानक दौरे पड़ते हैं। सिर पर गंभीर चोट लगने, मस्तिष्क का संक्रमण या ट्यूमर के अलावा आनुवंशिक (जेनेटिक) कारणों से भी मिर्गी के दौरे पड़ सकते हैं। पर इसका एक कारण और हो सकता है। यदि मस्तिष्क को रक्त और ऑक्सीजन की सप्लाई बराबर न मिले तब भी ऐसे लक्षण प्रकट हो सकते हैं।
एक मल्टी सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल ऐसे ही समय में काम आता है। मरीज को कार्डियोलॉजी विभाग को रिफर कर दिया गया। इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ चेतन चतुर्वेदी ने बताया कि मरीज का ईसीजी करने पर धड़कनों की संख्या काफी कम निकली। इसे ब्रेडीकार्डिया कहते हैं। 50 बीट प्रति मिनट से कम धड़कन होने पर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है। महिला की धड़कन 20 से 30 बीट प्रति मिनट के बीच ऊपर नीचे हो रही थी। धीमी धड़कन के कारण मस्तिष्क तक पर्याप्त ऑक्सीजन और खून न पहुंचने से बार-बार बेहोशी के दौरे पड़ रहे थे जो मिर्गी जैसे लग रहे थे।
डॉ चतुर्वेदी ने बताया कि मरीज की विस्तृत जांच करने के बाद पेस मेकर लगाने की जरूरत महसूस की गई। परिजनों को पूरी स्थिति से अवगत करा दिया गया। धड़कनों को स्थिर करने और तेज करने के लिए मरीज को पेसमेकर लगाने की सलाह दी गई। परिवार की स्वीकृति मिलने पर मरीज को पेसमेकर लगा दिया गया।
पेसमेकर लगाने के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार हुआ। उन्हें जल्द ही अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी।
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