हसरत ने कलम और किताब से पाया वह सबकुछ जो अकल्पनीय लगती है

हसरत ने कलम और किताब से पाया वह सबकुछ जो अकल्पनीय लगती है

मुंबई। यदि आपमें अपने काम के प्रति जुनून हो तो क्या नहीं हो सकता। शायद इसीलिए कहा जाता है – “कौन कहता है आसमां में सुराख नहीं हो सकता। एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों।” केवल किताबें पढ़कर और गीत लिखकर हसरत जयपुरी ने न केवल शोहरत की बुलंदियों को छुआ बल्कि अपनी आने वाली 10 पीढ़ियों के फ्यूचर को सिक्योर भी कर गए। जब उन्होंने दुनिया को अलविदा कहा, तब भी उनके हाथों में किताब और उंगलियों में कलम फंसी थी।

15 अप्रैल 1922 को राजस्थान के जयपुर में जन्मे हसरत जयपुरी का असली नाम इकबाल हुसैन था। चौपाटी पर खिलौने बेचने और बस कंडक्टर की नौकरी से शुरू हुआ उनका सफर उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के शीर्ष गीतकारों में ले आया। शंकर-जयकिशन और राज कपूर के साथ उनकी जोड़ी ने कई यादगार गाने दिए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब रही, जो उनके काम के प्रति जुनून को दिखाती है।

उनके भांजे डब्बू मलिक बताते हैं- हम बहुत छोटे थे, तब खार स्थिति मामा हसरत जयपुरी के घर पर जाते थे। घर से बालकनी से सटा उनका बेड होता था, जहां बैठकर वे पोयट्री लिखते थे। बड़े-बड़े डायरेक्टर, प्रोडूसर, एक्टर का हुजूम उनसे मिलने के लिए घर आते थे। यह जानने के लिए हमें वर्षों लग गए कि लोग उन्हें इतनी इज्जत क्यों देते हैं। धीरे-धीरे पता चला कि मामाजी बहुत बड़े गीतकार हैं।

उनका बहन-बहनोई आदि का काफी बड़ा कुनबा था और वे सबको बड़ा प्यार देते थे। सबका खयाल रखते थे, उनकी यह सबसे बड़ी विशेषता थी। लोगों की जिंदगी के बारे में सोचते थे और उसमें मग्न रहते थे। हम लोग सोचते थे कि उनका ध्यान आकर्षित करना बहुत मुश्किल था क्योंकि वे दिन भर लिखने-पढ़ने में लगे रहते थे।

संगीतकार जय किशन का जब निधन हुआ तो नेशनल रेडियो पर उनका लिखा गीत बज रहा था। वह गीत था- ‘गीतों का कन्हैया चला गया, अब गीत मेरे विरान हुए…’, इसे सुनकर उनके आंसू रुक नहीं रहे थे। शायद इसकी कम्पोजिशन शंकर-जयकिशन जी ने की थी। उनके गीतों पर शंकर-जयकिशन की जोड़ी ने बड़ा दिलकश काम किया।

जुहू में उनका भव्य बंगला था। फाइनेंशियली बहुत ही सिक्योर इंसान थे। वे और उनकी वाइफ ने फैमिली के लिए बड़े-बड़े डिसीजन लिये। अपने जमाने में उनकी बहुत ही सक्सेसफुल फैमिली रही है। वे आने वाली 10 पीढ़ियों को सिक्योर करके चले गए। आखिरी सांस तक उनके हाथ में कलम और किताब थी।

#Hasrat_Jaipuri

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