गुस्ताखी माफ : टूटा भ्रम तो बंद हुआ वंदे भारत

देश की एक बड़ी आबादी यूटोपिया में जी रही है. यह आबादी का वह हिस्सा है जो बातों-बतोलेबाजियों में ज्यादा यकीन करता है. यह केन्द्रीय प्रचार तंत्र का शिकार हो … Read More

विश्व परिवार दिवस और वसुधैव कुटुम्बकम की भारतीय अवधारणा

सनातन “वसुधैव कुटुम्बकम” का सिद्धांत देता है. पर इसके लिए एक शर्त भी है – “उदार चरितानां”. अर्थात चित्त अगर उदार है तो पूरा विश्व एक परिवार है. यही उदारता … Read More

गुस्ताखी माफ : छलका महिला महापौरों का दर्द

छत्तीसगढ़ फिलहाल इलेक्शन-मोड में है. कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा सभी जिम्मेदारों से उनका दुःख दर्द पूछ रही हैं. जहां कहीं भी संभव हो पा रहा है, बातचीत के जरिए मन-मुटावों … Read More

गुस्ताखी माफ : नोबेल विजेता टैगोर भी रह गए केवल बंगालियों के

रविन्द्रनाथ टैगोर (ठाकुर) को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था. देश के राष्ट्रगान – जन-गण-मन के रचयिता कविगुरू रविन्द्रनाथ ठाकुर अब केवल बंगालियों के होकर रह … Read More

कालीबाड़ी में कविगुरू रविन्द्रनाथ ठाकुर को दी स्वरांजली

भिलाई। भारत के प्रथम नोबेल विजेता कविगुरू रविन्द्रनाथ ठाकुर (टैगोर) की 162वीं जयंती पर नेहरू नगर कालीबाड़ी में उन्हें स्वरांजली दी गई. मानव मंगल समिति के तत्वावधान में हुए इस … Read More

गुस्ताखी माफ : सह अस्तित्व का सिद्धांत इसलिए जरूरी

कभी राजा अपने दलबल के साथ शिकार खेलने के लिए जंगल जाता था. अब भालू, हाथी, बाघ, तेंदुआ भोजन की तलाश में गांव आते हैं. हाथियों को गांव और खेत-खलिहान … Read More

बरुण स्मृति सम्मान समारोह-2023 भी हुआ “स्वयंसिद्ध”

भिलाई का कला-साहित्य जगत हमेशा सक्रिय रहा है. जात्रा और थिएटर के इस शहर ने कई पड़ाव देखे हैं. इप्टा, इम्पा, ट्रिपल-एम की सक्रियता तो थी ही, साहित्य के क्षेत्र … Read More

गुस्ताखी माफ : गौसेवा, शंकराचार्य और साईं बाबा

ज्योतिष पीठ के प्रमुख शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा गौ-संरक्षण को लेकर किए जा रहे काम की सराहना की है. पर उन्हें इस बात का भी दुःख है … Read More

गुस्ताखी माफ : कार्ल मार्क्स, धर्म और अफीम का धंधा

5 मई को प्रसिद्ध जर्मन दार्शनिक और समाजशास्त्री कार्ल मार्क्स का जन्मदिन था. मार्क्स को हम मार्क्सवादियों के कारण जानते हैं. ऐसा माना जाता है कि मार्क्स पूंजीवाद के खिलाफ … Read More

गुस्ताफी माफ : तो क्या खोद दें सारी सड़कें, हटा लें ट्रैफिक सिग्नल

देश में अच्छी सड़कें मौत का कारण बन रही हैं. शायद हम इसके लायक ही नहीं हैं. सड़कें अच्छी होती हैं तो हम तूफानी रफ्तार पकड़ लेते हैं. गाड़ियों में … Read More

गुस्ताखी माफ : मुद्दाविहीन राजनीति और शराब

शराब को लेकर देश की संवेदनशीलता कुछ अजीब सी है. शराब बड़ी पार्टियों की शान है. वहां महंगी से महंगी विदेशी शराब परोसी जाती है. नेता, अभिनेता, बिजनेसमैन, डाक्टर, इंजीनियर, … Read More

आदिवासियों को या तो मरना होगा या फिर जाना होगा

भारत ही क्यों, किसी भी देश में एक दूसरे के धुर विरोधी दो वर्ग हमेशा रहे हैं. एक वह जिसके पास सबकुछ है और दूसरा वह जिसके पास अपने जीवन … Read More