चीर घर के टेबल से उठकर नंगा ही भाग निकला "मृत" युवक

चीर घर के टेबल से उठकर नंगा ही भाग निकला “मृत” युवक

गुना। कई बार आपने सुना होगा कि मुर्दा वापस जिंदा हो गया। कुछ लोग तो इसके बाद दूसरी दुनिया की कहानी सुनाते हुए भी मिले। कोई श्मशान में चिता से उठ बैठा तो किसी का शव घर लौटते समय हरकत कर उठा। पर यहां जो कुछ हुआ वह किसी फिल्मी सीन से कम नहीं है। एक युवक के शव को पोस्टमार्टम के लिए चीरघर लाया गया था। स्टील की ठंडे टेबल पर लेटे लेटे उसे होश आ गया। इधर उधर नजर घुमाते ही उसे चीरघर का अहसास हो गया। वह उसी हालत में टेबल से उठा और बाहर भाग गया। (Ai Image from navabharattimes.com)

पीएम हाउस के आसपास मौजूद लोगों ने जब पीएम हाउस से नग्न अवस्था में एक युवक को बदहवास सा भागते देखा तो होश फाख्ता हो गए। बाद में युवक को संभाला गया। दरअसल सल्फास खाकर आए एक युवक को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था, जिसे पीएम के लिए भेजा गया था। जब युवक को मर्चुरी की ठंडी मेज पर अचानक होश आ गया और वह खुद को नग्न अवस्था में पाकर, जान बचाने के लिए वहां से बाहर की ओर भागा। अस्पताल परिसर में एक कथित मृत व्यक्ति को जिंदा होकर भागते देख मरीजों और स्टाफ के बीच हडक़ंप मच गया और लोग डर के मारे इधर-उधर भागने लगे।

मिली जानकारी अनुसार, हड्डीमील क्षेत्र के निवासी जॉन पारदी ने मानसिक प्रताडऩा से तंग आकर जहरीले पदार्थ (सल्फास) खा लिया था। अचेत अवस्था में परिजन उसे तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बिना कोई खास जांच या परीक्षण कर उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में कागजी औपचारिकताएं पूरी कीं और शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी हाउस भिजवा दिया।

जॉन ने बताया कि जब उसे होश आया, तो वह एक ठंडी मेज पर पूरी तरह नग्न अवस्था में लेटा हुआ था। चारों ओर लाशों की दुर्गंध और सन्नाटा देख उसे तुरंत आभास हुआ कि वह मुर्दाघर के भीतर है और डॉक्टर उसे मृत समझकर उसका पोस्टमार्टम करने वाले हैं। मौत के खौफ से डरा युवक उसी अवस्था में मर्चुरी से बाहर की ओर भागा। घटना पिछले हफ्ते की है, जिसका पीड़ित और परिजन अब खुलासा कर रहे हैं। जॉन पारधी का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उसके कागज से लेकर तमाम दस्तावेज गायब कर दिए।

जॉन पारदी को पोस्टमॉर्टेम हाउस से बदहवास सा भागते देख आसपास मौजूद लोगों की रूह कांप गई। कुछ ही देर में उसके परिजन भी वहां पहुंच गए और उन्होंने उसे संभाला। पीड़ित युवक ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि, यदि उसे समय पर होश नहीं आता, तो शायद डॉक्टर उसे जीवित अवस्था में ही चीर-फाड़ कर मार देते। बेहद अमानवीय ओर गंभीर घटना ने जिला अस्पताल की जांच प्रक्रिया और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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