1776 में रामचरित मानस पर अवधी में लिखी गई पांडुलिपि ज्ञानभारतम में दर्ज

1776 में रामचरित मानस पर अवधी में लिखी गई पांडुलिपि ज्ञानभारतम में दर्ज

’ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान’ में भागीदार बनने की अपील

अम्बिकापुर। कलेक्टर एवं ज्ञानभारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण अभियान के जिला समिति के अध्यक्ष श्री अजीत वसंत के मार्गदर्शन तथा जिला पंचायत सीईओ एवं समिति के सदस्य सचिव श्री विनय अग्रवाल के निर्देशन में जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने के लिए ‘ज्ञान भारतम राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण‘ अभियान 15 मार्च से जारी है जो 15 जून तक चलेगा।

कलेक्टर श्री वसंत ने लोगों से प्राचीन पांडुलिपियों को नष्ट होने से बचाने के लिए चलाए जा रहे इस सर्वेक्षण अभियान में सहयोग प्रदान करने अपील की है। उन्होंने कागज, भोजपत्र, ताड़पत्र, कपड़े आदि में हस्तलिखित सामग्रियों की जानकारी देने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि यह अभियान प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने का ऐतिहासिक प्रयास है।

उदयपुर के झिरमिट्टी में मिली लगभग 250 वर्ष पुरानी पांडुलिपि- अभियान अंतर्गत व्यापक सर्वेक्षण के दौरान उदयपुर विकासखण्ड के ग्राम झिरमिट्टी में लगभग 250 वर्ष पुरानी हस्तलिखित पांडुलिपि प्राप्त हुई, जिनका डिजिटल संरक्षण ’ज्ञानभारतम’ एप के माध्यम से किया गया। मौके पर ही मोबाइल के जरिए पांडुलिपी की फोटो अपलोड कर उन्हें जिओ टैग किया गया।

अभियान के अंतर्गत सर्वेक्षण के दौरान जिले में मिली यह पांडुलिपि ग्राम झिरमिट्टी के निवासी शैलेंद्र मिश्रा के घर से प्राप्त हुई। इसके बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि विवाह के पश्चात उनकी पत्नी रश्मि शुक्ला अपने मायके से इस पांडुलिपी को लेकर आयी थीं। ये मध्यप्रदेश के सतना जिला के कोठरी पोस्ट के ग्राम खटोला में रश्मि के पांच पीढ़ी पूर्व उनके पूर्वज स्वर्गीय श्री बलदेव शुक्ला के द्वारा लिखा गया है। शैलेंद्र बताते हैं कि मेरे ससुर रमेश चंद्र शुक्ला ने इसके विषय में मुझे बताया कि यह रचना लगभग 1776 के आसपास की गई है। पूरी रचना अवधी में है, पांडुलिपि रामचरित मानस पर आधारित है, पांडुलिपि सुस्पष्ट एवं आकर्षक है। यद्यपि अत्यधिक पुरानी होने के कारण क्षतिग्रस्त हो चली है। सर्वेक्षण दौरान संयुक्त कलेक्टर शारदा अग्रवाल, जिला समिति के विशेषज्ञ सदस्य श्रीश मिश्र, सीईओ जनपद पंचायत उदयपुर वेदप्रकाश गुप्ता, सहायक प्राध्यापक खेमकरण अहिरवार तथा सम्बंधित उपस्थित रहे। पांडुलिपि को जिओ टैग करने का कार्य श्रीश मिश्र द्वारा किया गया।

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