भिलाई। प्रसिद्ध पत्रकार एवं लेखक डॉ हिमांशु द्विवेदी का मानना है कि किसी बात को कब, कहां और कैसे कही जाए, इसका सलीका हो तो उद्देश्य में सफलता मिलती ही है। उन्होंने अपने जीवन के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इसका सुफल बार-बार प्राप्त होता रहा है। आईसीएआई भवन में प्रेस क्लब द्वारा आयोजित एकल व्याख्यान को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि 17 साल की उम्र में वे एकाएक ही पत्रकार बन गए थे। इसके लिए उन्हें अपने परिवार का कोप भी सहना पड़ा। दीदी ने पीएमटी पास कर एमबीबीएस में प्रवेश कर लिया था। घर वाले चाहते थे कि बेटा इंजीनियरिंग करे। पर उनका झुकाव आर्ट्स की तरफ था। वे राष्ट्रीय स्तर की भाषण प्रतियोगिता एवं वाद विवाद प्रतियोगिता जीत चुके थे। दीदी ने जहां पिता की इज्जत बढ़ा दी थी वहीं उनका कदम कथित रूप से नाक कटवाने वाला था। इसलिए परिवार ने हाथ खींच लिया।












