भिलाई। माता-पिता स्वयं बच्चों की मुट्ठी से अपनी उंगली छुड़ा लेते हैं और फिर बच्चों के बागी हो जाने की शिकायत करते हैं। इसके साथ ही बच्चों की सुने बिना उनपर अपनी इच्छाओं और फैसलों को थोपने के कारण स्थिति और बिगड़ जाती है। माता-पिता जहां दुखी रहते हैं वहीं बच्चा अकेला, अलग-थलग पड़ जाता है। उक्त बातें वरिष्ठ पत्रकार एवं शिक्षक दीपक रंजन दास ने उड़ान की कार्यशाला में माताओं को संबोधित करते हुए कहीं।












