दुर्ग। अंतर्विषयक अध्ययन वर्तमान समय की आवश्यकता है। इसमें सफलता की अपार संभावनाएं हैं। रसायन शास्त्र में मेंडलीफ की आवर्त सारिणी के निर्माण के दौरान वैज्ञानिक मेंडलीफ ने संस्कृत भाषा की सहायता ली थी। ये उद्गार पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के रसायन शास्त्री एवं बेसिक साइंस इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. के.के. घोष ने आज शास. विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के रवीन्द्रनाथ टैगोर सभागार में व्यक्त किये।












