भिलाई। किशोरावस्था में न केवल शरीर व्यापक परिवर्तनों के दौर से गुजरता है बल्कि व्यक्ति को अनेक मानसिक एवं सामाजिक चुनौतियों का भी सामना करना पड़ता है। यही वह उम्र है जब एक स्वस्थ मन एवं शरीर के विकास की नींव पड़ती है। अतः श्रेष्ठ भावी जीवन के लिए इन परिवर्तनों की समझ किशोरों के साथ ही उनके माता-पिता को भी होना जरूरी है। यह बातें किशोरों की स्वास्थ्य समस्याओं पर एमजे कालेज ऑफ नर्सिंग में आयोजित राज्य स्तरीय सेमीनार को संबोधित करते हुए एडॉलसेन्ट हेल्थ अकादमी की राज्य इकाई के अध्यक्ष डॉ एपी सावंत ने व्यक्त किये।












