दुर्ग। परसाई जी 20वीं शताब्दी के महत्वपूर्ण लेखक थे। उन्होंने अपनी गहन अंतरदृष्टि से समाज की विसंगतियों तथा विद्रुपताओं को देखा तथा समाज को अपनी रचनाओं के आईने में दिखाया। उक्त विचार हिन्दी विभाग द्वारा परसाई जयंती पर आयोजित संगोष्ठी में विभाग के प्राध्यापक डॉ. जय प्रकाश ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि परसाई जी से पूर्व कबीर, भारतेन्दु और बालमुकुन्द गुप्त भी सशक्त व्यंग्यकार रहें है। परसाई उन सबसे अलग इस अर्थ में है कि वे जीवन तथा समाज को वैज्ञानिक तथा तार्किक ढंग से देखते थे।












