चलो, अंततः लोगों ने आहार शृंखला (फूड सायकल) को स्वीकार कर ही लिया. लोग अगर सिर्फ घास-पत्ता खाते रहे तो शाकाहारी पशुओं की संख्या इतनी अधिक हो जाएगी कि वो किसी के लिए कुछ भी नहीं छोड़ेंगे. खेतों में घुस आए इक्का-दुक्का मवेशियों को तो लोग लाठियों से हकाल देते हैं पर यदि जंगल, खेत, मोहल्ला और बाड़ी भी भेड़-बकरी, गाय-भैस, हिरन-सांभर से भर जाएंगे तो लोग खाएंगे क्या? जंगल की व्यवस्था भी इसी आहार शृंखला पर टिकी हुई है. मांसाहारी जानवर, शाकाहारी जानवरों की संख्या को सीमित करते हैं.












