Student Burnout

Commercialization of education

स्कूलों में न जाने ऐसा क्या पढ़ाया जा रहा है कि भारत की पूरी संस्कृति ही खतरे में पड़ गई है. इसका गलत मतलब निकालने की जरूरत नहीं है. पाठ्यक्रम में कुछ भी गलत-सलत नहीं पढ़ाया जा रहा. पर स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाला मंत्रालय, विभाग, संस्थाएं और पाठ्यपुस्तक छापने वाले मिलकर एक ऐसा खेल-खेल रहे हैं जिसके लाभ कम और नुकसान ज्यादा हैं. साल दर साल पाठ्यक्रम में नई-नई चीजें जुड़ती जा रही हैं. पढ़ाई का बोझ इतना बढ़ गया है कि बच्चों को अवकाश देने में भी तकलीफ होने लगी है.

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