शराब को लेकर देश की संवेदनशीलता कुछ अजीब सी है. शराब बड़ी पार्टियों की शान है. वहां महंगी से महंगी विदेशी शराब परोसी जाती है. नेता, अभिनेता, बिजनेसमैन, डाक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर भी शराब पीते हैं. जिसकी जितनी कमाई, उसकी उतनी महंगी दारू. यह इनकम टैक्स जैसा है जिसमें लोग अपनी-अपनी क्षमता के अनुसार सरकार के खजाने में अंशदान करते हैं. शराब बंदी की बात करते समय अकसर हम यही कहते हैं कि शराब परिवारों को बर्बाद कर रही है. इससे घरेलू हिंसा को बढ़ावा मिलता है, शारीरिक-मानसिक सेहत बिगड़ती है.












