शिक्षा का प्रसार और शिक्षा की गुणवत्ता दो अलग-अलग मुद्दे हैं. सरकार शिक्षा सुविधा का विस्तार कर सकती है पर शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए वह अकेले ज्यादा कुछ नहीं कर सकती. यह जिम्मेदारी समाज की है कि वह शिक्षा को लेकर संवेदनशील हो. शिक्षा सत्र का आरंभ विद्यार्थियों को तिलक लगाकर उनका सम्मान करने के साथ शुरू तो होती है पर इसके बाद कभी शिक्षक गायब तो कभी विद्यार्थी. छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए अनेक उपाय किये गये हैं.












