जो लोग पहले फल तोड़ने के लिए कुल्लू मनाली के बागों जाते थे, अब वे उन फलों को अपने यहां ही उगाने लगे हैं. पारम्परिक खेती से 7-8 हजार रुपए कमाने वालों का आमदनी 10 गुना बढ़ गई है. धान, कोदो, कुटकी, रामतिल की बजाय अब वे सेब, आम, नाशपाती, लीची, अमरूद, काजू, स्ट्रॉबेरी जैसे फल पैदा कर रहे हैं. यहां से फल झारखंड, मध्यप्रदेश, बिहार, यूपी, ओडिशा, प. बंगाल तक जा रहा है. फलों की इस खेती में अधिकांश पहाड़ी कोरवा जनजाति के हैं.












