भिलाई। भारतीय जनमानस में चरित्र की परिभाषा बेहद सीमित है. वास्तविकता यह है कि जीवन में अनुशासन, समय की पाबंदी, कानूनों के प्रति सम्मान सभी चरित्र का हिस्सा हैं. एक राष्ट्र विकसित तभी हो सकता है जब वहां के लोगों अपने चरित्र में इन सभी बातों का ध्यान रखें. यही वह अंतर है जो विकसित राष्ट्रों को विकासशील राष्ट्रों से अलग बनाता है. उक्त बातें एमजे ग्रुप ऑफ एजुकेशन की डायरेक्टर डॉ श्रीलेखा विरुलकर ने कहीं. वे एमजे कालेज ऑफ फार्मेसी के नवप्रवेशितों को संबोधित कर रही थीं.












