सरकारी कालेज में बढ़ी MBBS की फीस, निजी मेडिकल कॉलेज का दिया हवाला

सरकारी कालेज में बढ़ी MBBS की फीस, निजी मेडिकल कॉलेज का दिया हवाला

गुआहाटी। असम सरकार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस कोर्सेज की फीस में बदलाव करने के बाद, नीट एस्पिरेंट्स के लिए मेडिकल की पढ़ाई महंगी हो गई है। 9 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों के बच्चों को अब सरकारी मेडिकल कॉलेजों से MBBS की पढ़ाई करने के लिए अब सालाना 1 लाख रुपये और BDS के लिए 75 हजार रुपये तक फीस देनी होगी। इस बीच, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने निजी संस्थानों की लाखों की फीस का हवाला दिया है।
दरअसल, असम सरकार ने नए एकेडमिक सेशन में एडमिशन लेने वाले स्टूडेंट्स के लिए सरकारी मेडिकल कॉलेजों में MBBS और BDS मेडिकल कोर्सेस की फीस बढ़ाने का फैसला लिया है। यह पहली बार है जब छात्रों के परिवार की वार्षिक आय के आधार पर फीस वसूली जाएगी।
9 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों को अब 1 लाख रुपये सालाना फीस देनी होगी वहीं 4 लाख से 9 लाख रुपये के बीच वार्षिक आय वाले परिवारों के लिए फीस 50,000 रुपये सालाना होगी। BPL और कम आय वाले परिवार (4 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले): 5,000 रुपये सालाना देंगे।
इसी तरह BDS में दाखिला  भी महंगा हो गया है। इसमें 9 लाख से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार: 75,000 रुपये सालाना, BPL और कम आय वाले परिवार (4 लाख रुपये से कम वार्षिक आय वाले): 3,750 रुपये सालाना  फीस देंगे। वहीं असाधारण आर्थिक तंगी या कठिनाई की स्थिति में कॉलेज के प्रिंसिपल लागू सरकारी फीस में 50% तक की छूट दे सकते हैं।
फीस बढ़ोतरी पर स्वास्थ्य मंत्री का तर्क
हाल ही में गुवाहाटी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने MBBS कोर्स की फीस बढ़ाने के राज्य सरकार के फैसले का बचाव किया। उन्होंने तर्क दिया कि नई फीस, निजी संस्थानों में मेडिकल शिक्षा की लागत की तुलना में काफी कम है। उन्होंने कहा कि नई फीस संरचना को छात्रों के परिवार की सालाना आय से जोड़ा गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के लिए भी मेडिकल शिक्षा सुलभ बनी रहे। उन्होंने कहा कि निजी संस्थानों में मेडिकल शिक्षा लेने वाले छात्रों को लगभग 40 लाख रुपये तक चुकाने पड़ सकते हैं, जबकि राज्य सरकार द्वारा की गई फीस बढ़ोतरी काफी कम है। मंत्री ने कहा, ‘हां, फीस बढ़ाई गई है। क्यों? क्योंकि यह सरकार का फैसला था। निजी संस्थानों में लोग इसके लिए 40 लाख रुपये दे रहे हैं। हमने बहुत मामूली बढ़ोतरी की है।’

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