“ऐ मेरे वतन के लोगों..” में हो सकती थी सुमन कल्याणपुर की आवाज
1964 में मशहूर देशभक्ति गीत “ऐ मेरे वतन के लोगों, जरा आंख में भर लो पानी…” को लताजी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के सामने प्रस्तुत किया था। यह कालजयी गीत आज भी जब बजता है तो आंखें नम हो जाती हैं। इस गीत के साथ ही इसे प्रस्तुत करने वाली भी अमर हो गई। पर क्या आपको पता है कि इस गीत को पहले सुमन कल्याणपुर गाने वाली थीं। सुमन ने इस गीत का बाकायदा रिहर्सल भी किया था।

एक साक्षात्कार में सुमन कल्याणपुर ने यह राज खोला था। सुमन ने बताया था कि वर्ष 1964 में मशहूर देशभक्ति गीत ए मेरे वतन के लोगों’ को गाने के लिए उनका चयन हुआ। सुमन कल्याणपुर ने इस गीत और मौके की महत्ता को समझते हुए गाने की तैयारी भी कर ली। यहां तक कि प्रधानमंत्री नेहरू के सामने इसकी रिहर्सल भी हुई, लेकिन ऐन वक्त पर यह गीत लता मंगेशकर को दे दिया गया।
पाश्र्व गायिका के रूप में सुमन कल्याणपुर ने अपने लंबे करिअर में 740 से अधिक फिल्मी और गैर-फिल्मी गीतों को अपनी सुरीली आवाज दी। हिंदी के अलावा उन्होंने मराठी, बंगाली, गुजराती, भोजपुरी, पंजाबी, असमिया, कन्नड़ आदि अन्य भाषाओं में भी गाया। मोहम्मद रफी के साथ 140 से अधिक युगल गीत गाने का भी उनका रिकॉर्ड है। वर्ष 2023 में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया।
साल 1952 में सुमन को ऑल इंडिया रेडियो पर गाने का अवसर मिला। सुमन को अभिनेता व फिल्ममेकर शेख मुख्तार ने रेडियो पर सुना तो शुक्राची चांदनी नामक मराठी फिल्म में गाने का मौका दिया। शुक्राची चांदनी के बाद शेख मुख्तार ने हिंदी फिल्म मंगू में भी सुमन को मौका दिया। इस फिल्म के लिए सुमन कल्याणपुर की आवाज में तीन गाने रिकॉर्ड किए गए थे, लेकिन एक विवाद के चलते संगीतकार मोहम्मद शफी उस फिल्म से हट गए और ओ.पी. नय्यर को मंगू का संगीत तैयार करने की जि़म्मेदारी मिली, तो सुमन कल्याणपुर की गाई सिफऱ् एक लोरी ही उस फिल्म में बची। वर्ष 1954 में गुरुदत्त ने अपनी फिल्म आर-पार में मौका दिया, किन्तु नियति का खेल यह रहा कि आर-पार के गीत ‘मोहब्बत कर लो जी भर लो, अजी किसने रोका है’ में संगीतकार ओ.पी. नय्यर ने इक्का-दुक्का लाइनें ही सुमन से गवाईं, बाकी यह गीत रफ़ी साहब व गीता दत्त से गवाया गया। इस पूरे गाने में वह बस एक कोरस गायिका ही बनकर रह गईं।
लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच रॉयल्टी विवाद के चलते साठ का दशक सुमन कल्याणपुर के लिए खूबसूरत समय बनकर आया। ‘आजकल तेरे मेरे प्यार के चर्चे’, ‘ना ना करते प्यार तुम ही से’, ‘तुमने पुकारा और हम चले आए’, ‘परबतों के पेड़ों पर शाम का बसेरा है’, ‘दिल ने फिर याद किया’, ‘तुझको दिलबरी की कसम’, ‘चांद तकता है इधर’ जैसे सैकड़ों सदाबहार गीत सुमन कल्याणपुर की झोली में आ गिरे। सुमन कल्याणपुर की आवाज लता मंगेशकर के काफी करीब थी, लेकिन उनकी आवाज की अपनी एक अलग रवानगी और खनक थी। फिर भी उनके गाए गीतों को सुनते ही अक्सर लोग मान लेते हैं कि यह तो लता गा रही हैं। उन्हें अक्सर ‘द अदर लता’ या ‘दूसरी लता’ कहा जाने लगा। यह दंश सुमन कल्याणपुर ने पूरे जीवन सहा।
उधर लता मंगेशकर और मोहम्मद रफी के बीच रॉयल्टी का विवाद समाप्त हुआ तो सुमन कल्याणपुर को काम मिलना कम होता गया। वर्ष 1981 में आई ‘नसीब’ फिल्म का गीत ‘जि़ंदगी इम्तिहान लेती है’ सुमन कल्याणपुर का आखिरी फिल्मी गीत साबित हुआ। ‘नसीब’ फिल्म के बाद सुमन कल्याणपुर को गाने के मौके मिले। लेकिन कभी ऐसा हुआ कि वे फिल्में ही रिलीज़ नहीं हुईं। यह भी हुआ कि सुमन जी की आवाज़ हटाकर किसी दूसरी गायिका से वे गाने गवा लिए गए।
वर्ष 2008 में सुमन कल्याणपुर के पति रामानंद कल्याणपुर के निधन के बाद सुमन कल्याणपुर ने सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होना लगभग बंद कर दिया था। पाश्र्वगायन के अपने 28 साल के करिअर में सुमन कल्याणपुर ने एक से एक बेशकीमती, सदाबहार गाने गाकर एक सम्मानजनक स्थान बनाया। स्वर साधना व स्वर सिद्धि के आकाश में वे ऊंचाई पर थीं। लेकिन प्रतिस्पर्धा और राजनीति से भरी हुई फिल्मी दुनिया में ‘द अदर लता’ या ‘दूसरी लता’ कहलाने से वह आहत ज़रूर थीं। उनकी मधुर, रेशमी और शहद-सी मीठी आवाज़ सदैव उनकी याद दिलाती रहेगी।
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