पोर्नोग्राफी का असर? 7 साल की बच्चियों को बांध कर नाबालिग ने किया यौन शोषण
बिलासपुर। पोर्नोग्राफी के चलते बच्चे भी यौन कुंठा का शिकार हो रहे हैं। सिरगिट्टी इलाके में 7-7 साल की दो बच्चियों को रस्सी से बांध कर उनका यौन उत्पीड़न किया गया। आरोपी भी नाबालिग है। पुलिस पर इस मामले में साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ करने और मांडवाली कराने के आरोप लग रहे हैं। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई है।

सूचना के अनुसार 17 साल के एक नाबालिग ने चॉकलेट देने के बहाने 7 साल की दो बच्चियों को अगवा किया। उनके साथ मारपीट की। परिजनों के मुताबिक, आरोपी पिछले कई दिनों से बच्चियों के साथ गलत हरकत कर रहा था। 27 मई को परिजनों ने उसे रंगे हाथों पकड़ लिया। वह गलत काम करते समय बच्चियों को रस्सी से बांधकर रखता था। 29 मई को पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार तो कर लिया, लेकिन मौके से सबूत जब्त नहीं किए।
परिजनों का आरोप है कि मौके पर मिली इन चीजों को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस ने कोई कदम नहीं उठाया। तत्काल FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित परिवार सुबह से देर रात तक थाने और अधिकारियों के चक्कर काटता रहा। हालांकि, वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही मामले में रिपोर्ट दर्ज की गई।
परिजनों के मुताबिक घटना के बाद बच्चियों का मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें उनके निजी अंगों में दर्द होने की पुष्टि हुई और संकेत मिले। पुलिस ने आरोपी का मेडिकल ‘निल’ कर दिया है। पीड़ित बच्ची की मां ने शिकायत की थी थाना प्रभारी और जांच अधिकारी केस की निष्पक्ष जांच करने के बजाय मामले को दबाने और समझौते का दबाव बना रहे हैं। पुलिस पीड़ित परिवार से कह रही है कि आरोपी तो पड़ोस का ही रहने वाला और जान-पहचान का लड़का है, इसलिए मामले को यहीं रफा-दफा कर लो।
शिकायत के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने ASI शीतला प्रसाद त्रिपाठी को बिलासपुर लाइन अटैच कर दिया है। DSP अनिता प्रभा मिंज के छुट्टी पर रहने की वजह से उनकी जगह पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रश्मित कौर चावला (आईयूसीएडब्ल्यू) को जांच का जिम्मा सौंपा है।
पीड़ित परिवार ने केस की जांच किसी बड़े और स्वतंत्र पुलिस अधिकारी से कराने की मांग की है। साथ ही घटना से जुड़े सभी सामान तुरंत जब्त कर किया जाए। सबूत जुटाने में लापरवाही बरतने वालों की अलग से जांच की जाए।
सिरगिट्टी थाना प्रभारी अभय सिंह बैस, सब इंस्पेक्टर शीतल प्रसाद त्रिपाठी और जांच अधिकारी संतोषी अग्रवाल को इस केस से पूरी तरह दूर रखा जाए। पीड़ित बच्चियों और उनके परिवार को तुरंत पुलिस सुरक्षा दी जाए। मामले की बिना किसी भेदभाव के समय पर जांच कर दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई हो।
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