Hindi-Parishad

दुर्ग। साहित्य परिषद साहित्य के विद्यार्थियों के लिए विमर्श का एक बेहतर मंच है। इसके माध्यम से वे साहित्य मनीषियों की जयंती या पुण्यतिथि पर उनका स्मरण कर सकते हैं। उक्त विचार शास. वि. या. ता. स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के स्नातकोत्तर हिन्दी परिषद के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. कोमल सिंह शार्वा (प्राचार्य शास. भानुप्रताप देव स्नातकोतर महाविद्यालय, कांकेर) ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि साहित्य के माध्यम से आज के जीवन को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं। डॉ. शार्वा ने ‘पत्रकारिता आज का समय और पत्रकारिता का स्वरूप’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

दुर्ग। साहित्य परिषद साहित्य के विद्यार्थियों के लिए विमर्श का एक बेहतर मंच है। इसके माध्यम से वे साहित्य मनीषियों की जयंती या पुण्यतिथि पर उनका स्मरण कर सकते हैं। उक्त विचार शास. वि. या. ता. स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय के हिन्दी विभाग के स्नातकोत्तर हिन्दी परिषद के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ. कोमल सिंह शार्वा (प्राचार्य शास. भानुप्रताप देव स्नातकोतर महाविद्यालय, कांकेर) ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि साहित्य के माध्यम से आज के जीवन को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं।
डॉ. शार्वा ने ‘पत्रकारिता आज का समय और पत्रकारिता का स्वरूप’ विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

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