भिलाई। बेटों को बंदूक-बल्ला तो बेटियों को तोहफे में गुड़िया और बर्तन देने का रिवाज है। बेटियों के जन्म पर मायूस और बेटों के जन्म पर खुशिया मनाता यह समाज लैंगिक असमानता के बीज बचपन में ही बो देता है। यह और बात है कि बेटियों की तरह बेटे भी समाज और परिवार की अपेक्षाओं के बोझ चले दब कर कराह रहे हैं। ऐसे में खुशहाल परिवारों की कल्पना भी नहीं की जा सकती। यह मसला माइलस्टोन के बच्चों ने अपने 24वें वार्षिकोत्सव ‘जेस्ट-2019’ ने पूरी शद्दत के साथ उठाया।












