भिलाई। केवल सिलेबस पढ़ाने से कोई गुरू नहीं हो जाता। विद्यार्थियों का विश्वास हासिल करना, उनके मन में अपने लिया जगह बनाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। शिक्षक गुरू तभी बन सकता है जब वह खुद में ऐसी बातें पैदा करें जो विद्यार्थी उनमें ढूंढ रहा होता है। गुरू वही हो सकता है जिसे विद्यार्थी गुरू मानें। उक्त बातें एमजे कालेज के फार्मेसी विभाग के प्राचार्य विजेन्द्र सूर्यवंशी ने आज गुरूपूर्णिमा के अवसर पर कहीं।












