वर्षों पहले एक फिल्म आई थी “हाथी मेरे साथी”. इस फिल्म के एक गीत ने पूछा था- ‘जब जानवर कोई इंसान को मारे, कहते हैं दुनिया में, वहशी उसे सारे. एक जानवर की जान आज इंसानों ने ली है, चुप क्यों है संसार?’सवाल आज भी वहीं है. गाय ही क्या किसी भी प्राणी को इस तरह दी गई मौत वीभत्स है. इसे माफ नहीं किया जा सकता. देश में पशु क्रूरता रोकने का कानून है. सर्कस से लेकर चिड़ियाघर तक पर प्रतिबंध लगा हुआ है. वन्य प्राणियों को पालना मना है. सिनेमा शुरू होने से पहले भी अस्वीकरण आता है – “इस फिल्म की शूटिंग के दौरान किसी पशु पक्षी को हानि नहीं पहुंचाई गई है.” पर पालतू पशुओं को कौन बचाए?












