जन्मदिन हो या विवाह वार्षिकी, बिना केक के कोई काम नहीं होता. बिना डांडिया के नवरात्रि नहीं होती, बिना पंजाबी पॉप के डांस नहीं होता. फिर छठ से बैर क्यों? एक किशोरी लोकगायिका के खिलाफ फतवा क्यों? वह भी तब जब राज्य शासन छठ पर शासकीय अवकाश की घोषणा करता है. छत्तीसगढ़ भारत का हृदय स्थल है. यहां भिलाई जैसा औद्योगिक तीर्थ है जिसे मिनी इंडिया कहा जाता है. राजनीतिक दृष्टिकोण से स्थानीय नेतृत्व की बात तो ठीक है पर इसे लेकर कला एवं संस्कृति पर हमला करना सर्वथा अनुचित और अवांछित है.












