शादी ब्याह में फूफाजी की नाराजगी भी उतनी ही जरूरी है जितनी कि बाकी रस्में. यदि फूफाजी खुश दिखाई दें तो यह मान लेना चाहिए कि उन्हें भी अपने मतलब की कोई चीज उस महफिल में मिल गई है. पर अमूमन ऐसा होता नहीं है. इसलिए फूफाजी मुंह फुलाते हैं. इसकी भी एक मियाद लगभग तय होती है. पहले फूफाजी को मुंह फुलाने दिया जाता है और फिर जब तय मियाद पूरी हो जाती है तो उन्हें मनाना शुरू कर दिया जाता है. फूफाजी ज्यादा देर तक मुंह फुलाए हुए रह भी नहीं सकते. उन्हें पता होता है कि यदि मात्रा पार कर गए तो फिर कोई पूछने वाला नहीं होगा.












