अजीब विडम्बना है कि जिसे धोकर हाथ साबुन से धोया था वह पाइप-लाइन के जरिये वापस थाली तक पहुंच गया. कोटा सहित बिलासपुर की कई बस्तियों के पेयजल में मानव मल के अंश मिले हैं. जब इन इलाकों में डायरिया फैलने लगी और मरीजों के लिए बिस्तर जुटाना मुश्किल हो गया तब इन इलाकों का सर्वे किया गया. यहां से पेयजल के सैम्पल लिये गये और उन्हें सिम्स के माइक्रोबायोलॉजी लैब में टेस्ट किया गया. यह देखकर वैज्ञानिकों की आंखें फटी रह गईं कि पीने के पानी में मानव मल के अंश तैर रहे हैं.












