बाल सक्षम नीति : सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों का होगा पुनर्वास

बाल सक्षम नीति : सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों का होगा पुनर्वास

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा बाल सक्षम नीति-2022 के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रदेशभर में सड़क जैसी परिस्थितियों में जीवनयापन कर रहे बच्चों के स्थायी रेस्क्यू, संरक्षण एवं पुनर्वास के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। 1 जून से 30 जून 2026 तक चलने वाले इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न जिलों में संयुक्त बचाव दल, जिला बाल संरक्षण इकाइयों तथा चाइल्ड हेल्पलाइन की टीमों द्वारा बाल श्रम, भिक्षावृत्ति, अपशिष्ट संग्रहण तथा असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण एवं पुनर्वास सेवाओं से जोड़ने की कार्रवाई की जा रही है।

अभियान के तहत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के तोसीर, लेंधरा और बरमकेला क्षेत्र में विशेष रेस्क्यू अभियान चलाया गया। बस स्टैंड, मंदिर, बाजार, स्लम बस्तियों तथा अन्य चिन्हित हॉटस्पॉट क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर बच्चों की पहचान की गई तथा उन्हें विभिन्न शासकीय योजनाओं से जोड़ने की पहल की गई।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जिला कार्यक्रम अधिकारी एवं जिला बाल संरक्षण अधिकारी के मार्गदर्शन में मरवाही विकासखंड के होटलों, कबाड़ दुकानों, पेट्रोल पंपों, निर्माण स्थलों तथा सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। लोगों को बाल सक्षम नीति-2022 की जानकारी देने के साथ ही आपात स्थिति में बच्चों की सुरक्षा एवं रेस्क्यू के लिए चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 और आपातकालीन सेवा 112 की जानकारी भी प्रदान की गई।

खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले में नगर पंचायत छुईखदान सहित बस स्टैंड, गैरेज, होटल, ढाबों, ईंट भट्ठों और श्रमिक बस्तियों में सघन अभियान चलाकर बाल श्रम, भिक्षावृत्ति तथा सड़क जैसी परिस्थितियों में रहने वाले बच्चों की पहचान एवं पुनर्वास के लिए कार्यवाही की गई।

बालोद जिले में बस स्टैंड, होटल, पान ठेला, कबाड़ी दुकानों, मंदिर परिसरों एवं बाजार क्षेत्रों में विशेष सर्वेक्षण एवं जागरूकता अभियान चलाया गया। टीमों ने बाल श्रमिकों, भिक्षावृत्ति में संलग्न बच्चों तथा असुरक्षित परिस्थितियों में रहने वाले बालकों की पहचान कर आवश्यक संरक्षणात्मक उपाय सुनिश्चित किए।

इसी प्रकार मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में ग्राम पंचायतों, बस स्टैंडों, होटलों एवं दुकानों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाकर नागरिकों को बाल संरक्षण संबंधी कानूनों एवं चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 की जानकारी दी गई। विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर हेल्पलाइन संबंधी पाम्पलेट एवं स्टीकर भी लगाए गए।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों ने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, संरक्षण और सम्मानजनक भविष्य उपलब्ध कराना है। विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई बालक या बालिका सड़क पर रहने, भिक्षावृत्ति, बाल श्रम अथवा अन्य असुरक्षित परिस्थितियों में दिखाई दे तो इसकी सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा आपातकालीन सेवा 112 पर दें, ताकि बच्चों को समय पर संरक्षण एवं पुनर्वास उपलब्ध कराया जा सके।

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