भिलाई। स्पर्श मल्टीस्पेशालिटी हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजिस्ट डॉ जयराम अय्यर का मानना है कि युवाओं में हृदयाघात के खतरे का पूर्वानुमान लगाना अकसर कठिन होता है। कई मामलों में इसका अनुमान केवल फैमिली हिस्ट्री के आधार पर ही लगाया जा सकता है। डॉ अय्यर ने बताया कि पहले जहां 45-50 साल की उम्र के बाद के मरीजों में ही हृदय की बीमारियों का खतरा देखा जाता था वहीं अब 20-22 साल की उम्र में भी दिल का दौरा पड़ रहा है। इसके लिए लाइफस्टाइल के अलावा केवल जेनेटिक फैक्टर ही जिम्मेदार होते हैं।












