दुर्ग। शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालर्य में प्रेमचंद जयंती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य एवं संरक्षक डॉ. एस. के. राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि विद्यार्थियों को व्याख्यान माला का लाभ उठाना चाहिए। प्रेमचंद हिन्दी साहित्य के पुरोधा हैं। उनके समग्र लेखन में भारत के ग्रामीण जीवन का यथार्थ व्यक्त हुआ है। उनके पात्र हमारे आस-पास के जीते जागते लोग हैं। प्रेमचंद की कहानियों को विद्यार्थी पढ़ें तथा उसमें जो संदेश हैं उसे अपने जीवन में आत्मसात करें।












