दुर्ग। शासकीय डॉ. वावा पाटणकर कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय के आईक्यूएसी के अन्तर्गत प्रख्यात वक्ता और शासकीय दिग्विजय स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगांव के हिन्दी प्राध्यापक डॉ. चंद्रकुमार जैन का भाषा, संप्रेषण और प्रस्तुति पर रोचक व्याख्यान आयोजित हुआ। डॉ. जैन ने छात्राओं को बताया कि शब्द तो अपने आप में जड़ होते है उसमें चेतना का प्राण फूँकने वाला तो वक्ता होता है। शब्द केवल शोर और तमाशा नहीं है शब्द तो ब्रम्ह है। भाषा सधी हुई होनी चाहिए और सधी भाषा साधना का काम हैै। साधना अभ्यास से आती है। ‘करत-करत अभ्यास के जड़मति होत सुजान।’












