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Arpan School Sector-4 Bhilai

भिलाई। हादसे अकसर जीवन का रुख मोड़ देते हैं। शांता के साथ भी ऐसा ही हुआ। 2008 में एक औद्योगिक हादसे ने उनके पति को मरणासन्न कर दिया। डाक्टरों ने जान तो बचा ली पर आगे के जीवन के बारे में आश्वस्त न कर सके। शांता ने पति को दोबारा खड़ा करने की ठान ली। दिन रात मां बनकर उनकी सेवा की। सफलता मिली। पति ठीक होकर काम पर लौट गए। इस हादसे ने शांता के जीवन को एक नया मकसद दे दिया। दोस्तों की सलाह पर उन्होंने आॅटिस्टिक बच्चों की जिम्मेदारी उठा ली। अब उनके पास 35 ऐसे बच्चे हैं जिन्हें अपना कहते हुए उनके परिवारों को भी शर्म आती है।

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