भिलाई। वह आम बच्चों जैसा नहीं है। उसकी अपनी दुनिया है। उसे हमारी वाली गणित नहीं समझती पर वह चुटकियों में दिए गए किसी भी तारीख का दिन बता सकता है। जब कभी फुर्सत में होता है तो चित्रकारी करता है। उसके चित्रों में अभिव्यक्त होती है उसकी नजरों की बारीकी। जी फाउंडेशन द्वारा अय्यप्पा मंदिर में आयोजित खास बच्चों की चित्रकारी प्रतियोगिता में उसे प्रथम पुरस्कार मिला। जी हां! हम बात कर रहे हैं जूही बैडमिंटन ऐकेडमी के संचालक जयंत देवांगन के 18 वर्षीय पुत्र रुपम देवांगन की। डाक्टरी जुबान में वह आॅटिस्टिक है। उसके पिता जयंत और दीदी जूही अंतरराष्ट्रीय स्तर के बैडमिन्टन खिलाड़ी हैं। जयंत आने वाले अगस्त महीने में वेटेरन टीम के साथ पोलैंड जाने वाले हैं।












