नई दिल्ली। बेंगलुरू के एक मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी के अध्ययन के अनुसार देश में दो करोड़ 75 लाख ऐसे दंपती हैं जो बांझपन के शिकार हैं तथा उन्हें बच्चे की चाहत है। 2020 तक इस आंकड़े में 10 फीसदी और इजाफा होने का अनुमान है। नर्चर आईवीएफ सेंटर की आईवीएफ एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ अचर्ना धवन बजाज कहती हैं कि स्वास्थ्य बीमा योजना अगर सभी प्रजनन प्रक्रिया, उपचार और अन्य देख रेख का कवर देता है तो यह प्रभावित दंपत्तियों के लिए वरदान साबित होगा जिनके पास उन्नत इलाज कराने की आर्थिक क्षमता नहीं है।












