Kabir-Jayanti

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ‘वर्तमान में कबीर की प्रासंगिकता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 15 जून को किया गया। विषय में प्रकाश डालते हुये महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कबीर के दोहे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है। पंद्रहवीं शताब्दी में उनके द्वरा कहे गए दोहे आज भी समसामयिक है। आतंकवाद हिंदू और मुस्लिम धर्म के लोगों के आपसी तनाव को कबीर ने दूर करने का प्रयास किया। कबीर ही ऐसे संत हैं जिनके दोहों और साखियों से हर बच्चे को एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा मिलती है। उनके दोहे ‘हिन्दू कहे मोहे राम प्यारा, तुर्क कहे रहिमाना’ जिसमें भक्ति में भावना प्रमुख होती है सच्चे भक्ति भाव से पत्थर में भी ईश्वर का दर्शन किया जा सकता है।

भिलाई। स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय में ‘वर्तमान में कबीर की प्रासंगिकता’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 15 जून को किया गया। विषय में प्रकाश डालते हुये महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कबीर के दोहे वर्तमान समय में भी प्रासंगिक है। पंद्रहवीं शताब्दी में उनके द्वरा कहे गए दोहे आज भी समसामयिक है। आतंकवाद हिंदू और मुस्लिम धर्म के लोगों के आपसी तनाव को कबीर ने दूर करने का प्रयास किया। कबीर ही ऐसे संत हैं जिनके दोहों और साखियों से हर बच्चे को एक अच्छा इंसान बनने की प्रेरणा मिलती है। उनके दोहे ‘हिन्दू कहे मोहे राम प्यारा, तुर्क कहे रहिमाना’ जिसमें भक्ति में भावना प्रमुख होती है सच्चे भक्ति भाव से पत्थर में भी ईश्वर का दर्शन किया जा सकता है।

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