दुर्ग। आत्महत्या सभ्य समाज पर एक अभिशाप की तरह है। अत्यधिक तनाव, अवसाद की स्थिति से गुजर रहे लोगों में इसकी संभावना अधिक होती है। यह एक मानसिक समस्या है। आत्महत्या के मामलों को महिमा मंडित करना, उसके कारणों और तरीकों की चर्चा करना अवसाद में जी रहे लोगों को उकसा सकता है। मीडिया को ऐसी खबरों के प्रकाशन को लेकर संवेनदशील होना चाहिए। उक्त बातें एनसीडी सेल द्वारा सेन्टर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च सीएफएआर के सहयोग से होटल कैम्बियन में आयोजित मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला में कही।












