भिलाई। स्कूल में 12 तथा कालेज में 3 साल अंग्रेजी पढ़ने के बाद भी विद्यार्थी केवल पासिंग मार्क्स के आसपास ही पहुंच पाते हैं। बोलना तो दूर, अंग्रेजी में एक पैराग्राफ लिखना भी इन विद्यार्थियों के लिए मुश्किल होता है। वे केवल वही लिख पाते हैं जो उन्हें पढ़ाया, लिखाया या सिखाया गया है। स्थिति तब और भी गंभीर हो जाती है जब 80 फीसदी नौकरियों में भाषा की बहुत बड़ी भूमिका होती है। उक्त बातें sundaycampus.com के संपादक दीपक रंजन दास ने शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खपरी में हाई स्कूल एवं हायर सेकण्डरी स्कूल के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहीं।












