भिलाई/संजय गुलाटी/ बच्चे जब स्कूल में आते हैं तब वे अपने जाने पहचाने संदर्भ में दैनिक जीवन में उपयोगी मूर्त वस्तु के बारे में अपनी मातृभाषा में बात कर पाते हैं। वे धारा प्रवाह बोल सकते हैं, बोली जाने वाली भाषा का उन्हें बुनियादी व्याकरण और बहुत से मूर्त शब्दों का ज्ञान भी होता है। वे अपनी सारी जरूरतें मातृभाषा में बता सकते हैं। इस प्रकार उनमें आपसी बातचीत का बुनियादी कौशल होता है। इस प्रकार का ज्ञान और कौशल कक्षा-1 के बच्चों के लिए पर्याप्त होता है, जहां शिक्षकों से यह उम्मीद की जाती है कि वे से उन सभी विषयों पर बातचीत करें जिसके बारे में बच्चों का अपना पूर्व अनुभव / ज्ञान होता है।












