दुर्ग। फैशन डिजाइन रोहन परियार का मानना है कि हाथकरघा और खादी ही फैशन का भविष्य है। भारत में भले ही लोग अब भी किफायती सिंथेटिक पसंद कर रहे हैं पर पर्यावरण के प्रति जागरूक विकसित राष्ट्रों में हाथकरघे से निर्मित फैब्रिक और परिधानों की अच्छी खासी डिमांड है। कोलकाता की प्रख्यात डिजाइनर शरबरी दत्ता की टीम के सदस्य रोहन मिलान फैशन वीक में शिरकत कर चुके हैं। यहां अविश एडुकॉम द्वारा आयोजित करियर सेमीनार को संबोधित करते हुए रोहन ने बताया कि हाथकरघे का मतलब आम तौर पर लोग खादी समझ लेते हैं जबकि ऐसा नहीं है। कांचीपुरम, माहेश्वरी, बाघ प्रिंट, चंदेरी, टसर सिल्क, बनारसी सिल्क, बालूचरी, सम्बलपुरी, कांथा स्टिच, बंधिनी, मूंगा सभी हाथकरघे पर बनती हैं।












