भिलाई। जीवन में यदि निखरना है तो कठिन संघर्ष का कोई विकल्प नहीं है। हमें केवल तितली की खूबसूरती दिखाई देती है, अकसर हम उसके जीवन के संघर्षों की अनदेखी कर देते हैं। एक खूबसूरत जिन्दगी के लिए तितली को अंडे से लार्वा, लार्वा से प्यूपा का चक्र होकर गुजरना पड़ता है। नाजुक सी तितली एक कठोर कवच को तोड़कर बाहर निकलती है। हमें भी अपना कम्फर्ट जोन छोड़कर बाहर निकलना होगा। तभी हमारा व्यक्तित्व और कृतित्व निखर पाएगा। उक्त बातें एमजे कालेज की डायरेक्टर श्रीलेखा विरुलकर ने आज कहीं।












