भिलाई। क्या परिकथा में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की पूरी शृंखला को पिरोया जा सकता है? इसका जवाब है हां। माइलस्टोन जूनियर के शिक्षकों एवं बच्चों ने इसे सच कर दिखाया है। ‘पिनोकियो’ की कथा में उसने न केवल अगणित बच्चों को मौका दिया बल्कि पिता-पुत्र के बीच के भावनात्मक संबंधों को भी खूबसूरती से उकेरा। पूरी कथा के दौरान पिनोकियो अपनी गलतियों से सीखता जाता है। अंत में अपने पिता के गले लगकर वह पश्चाताप भी करता है और सच्ची खुशी का अहसास भी करता है।












