SSMV-Guest-Lecture

भिलाई। डीएनए की थोड़ी सी मात्रा को जीन एम्प्लीफिकेशन के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। इससे इसका अध्ययन करना आसान हो जाता है। इसे पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) तकनीक कहते हैं। बदलते हुए पर्यावरण में विभिन्न घातक बीमारियों के डायग्नोसिस एवं ट्रीटमेंट के लिए पीसीआर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे डीएनए के अध्ययन में मदद मिलती है। उक्त बातें सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी भोपाल के निदेशक डॉ दीपक भारती ने श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही।

भिलाई। डीएनए की थोड़ी सी मात्रा को जीन एम्प्लीफिकेशन के माध्यम से बढ़ाया जा सकता है। इससे इसका अध्ययन करना आसान हो जाता है। इसे पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) तकनीक कहते हैं। बदलते हुए पर्यावरण में विभिन्न घातक बीमारियों के डायग्नोसिस एवं ट्रीटमेंट के लिए पीसीआर तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इससे डीएनए के अध्ययन में मदद मिलती है। उक्त बातें सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर बायोलॉजी भोपाल के निदेशक डॉ दीपक भारती ने श्री शंकराचार्य महाविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कही।

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