भिलाई। आधुनिक जीवन शैली के नीचे कहीं दब गई है हमारी मौलिकता। खो गए हैं वो पल, जिनके लिए मन तड़पता है। सखियों का साथ बैठना, हंसना-खिलखिलाना, अभिसारिका के हाथों के कोमल स्पर्श को महसूस करना, संतान से जीवन्त सम्पर्क, नन्दिनी के चित्रों में वह सबकुछ है जो सुखद जीवन के अपरिहार्य अंग हैं। नन्दिनी की तूलिका इन प्रसंगों को चटख रंगों से जीवंत कर देती है। जीवन प्रवाह ‘फ्लो ऑफ़ लाइफ’ का उनका समृद्ध संग्रह बरबस ही आपको एक अलग दुनिया में ले जाता है। उनके अमूर्त एवं साकार चित्रों में जनजीवन को भी अभिव्यक्ति मिलती है। नकी कृतियों की प्रदर्शनी नेहरू आर्ट गैलरी में गुरुवार को प्रारंभ हुई।












