दुर्ग। अच्छे शिक्षक की पहचान उसकी अच्छी शिक्षण क्षमता होती है। प्रत्येक शिक्षक को पूर्ण तैयारी के साथ कक्षाओं में जाना चाहिए। जब तक विद्यार्थियों के साथ सामंजस्य स्थापित नहीं हो जाता तब तक विद्यार्थी को कक्षा में लाभ नहीं मिल पाता। ये उद्गार उच्चशिक्षा विभाग के अपर संचालक, दुर्ग संभाग डॉ. सुशीलचन्द्र तिवारी ने व्यक्त किये। डॉ. तिवारी शासकीय विश्वनाथ यादव तामस्कर स्नातकोत्तर स्वशासी महाविद्यालय में आयोजित नवनियुक्त सहायक प्राध्यापकों, जनभागीदारी मद से मानदेय पर नियुक्त सहायक प्राध्यापकों तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा नियुक्त अतिथि प्राध्यापकों हेतु नई शिक्षण पद्धति पर केन्द्रित दो दिवसीय कार्यशाला को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित कर रहे थे।












