Odia-Language-Seminar

Bhasha Sammelan in Sambalpur University

संबलपुर। आंचलिक देशज शब्दों के व्यवहार से ओड़िया भाषा और भी समृद्ध हो पाएगी। आंचलिक देशज शब्दों का व्यवहार ही आत्मियता को बढ़ाता है। भाषा के विकास में आंचलिकता तो रहेगी, किन्तु यह विभाजन नहीं होगा। आंचलिक भाषा के गीत को लेकर शास्त्रीय ओड़िया भाषा संपूर्ण नहीं हो सकती। उक्त उद्गार साहित्यकार एवं पूर्व प्रशासक संजीव चन्द्र होता ने राष्ट्रीय भाषा सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए कहीं।

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