भिलाई। जीवन को एक मकसद दे देना हजार दुश्वारियों का अंत कर सकता है। बलात्कार के बाद तृषा अपना अंत करना चाहती है पर पढ़ाने की अपनी जिजीविषा उसे रोकती है और फिर बच्चों को पढ़ाना ही उसके जीवन का मकसद बन जाता है। लोहित की प्रेमिका का रेप हो जाता है और वह उसकी जिन्दगी से गायब हो जाती है। लोहित अपराध को होने से पहले रोकने की दिशा में स्वयं को समर्पित कर देता है और यही उसके जीवन का मकसद बन जाता है। हादसे के तीन वर्ष बाद उनकी मुलाकात नाटकीय परिस्थिति में होती है और वे इस शर्त के साथ साथ रहने को तैयार हो जाते हैं कि वे कभी विवाह नहीं करेंगे। यही कथानक है ‘लेट अस नेवर गेट मैरीड’ का। इसे लिखा है युवा इंजीनियर अर्पित अग्रवाल ने।












