भूपेन्द्र कुलदीप की पुस्तक उड़ान की सरलता और सहजता प्रभावित करती है। छोटे-छोटे संवादों के सहारे कथानक द्रुत गति से आगे बढ़ता है। पाठक इस तरह खो जाता है कि कब पुस्तक समाप्त हो जाती है, पता ही नहीं लगता। इसमें प्रेम है, पिता-पुत्र और पिता-पुत्री के बीच की संवेदनाएं हैं, मदद करने वाले मित्र है। छोटी-छोटी नौकरियां हैं और बड़े-बड़े सपने हैं। स्वाध्याय और परस्पर सहयोग से बड़े लक्ष्यों की प्राप्ति का रास्ता है। भूपेन्द्र उन सफल रचनाकारों में से हैं जिन्हें पढ़ते समय मन कुछ और पन्नों को पढ़ने के लिए व्याकुल हो जाता है। यह पुस्तक लेखक के अपने जीवन संघर्ष को अभिव्यक्त करती है।












