भिलाई। इस शरीर रूपी पुतले के अंदर मैं चेतन शक्ति हूँ, जिसे तनाव, दुःख, अशांति, सुख, आदि की अनुभूति होती है। राजयोग द्वारा इसी शक्ति पुंज को दिव्य बनाना है। उक्त बातें प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे दिन वरिष्ठ राजयोग प्रशिक्षक ब्रह्मकुमारी प्राची दीदी ने कहीं।












