दुर्ग। शोधकर्ताओं को शोध कार्य इस प्रकार करना चाहिए कि वह समाज के हित में हो। केवल पीएचडी उपाधि प्राप्त करने के पश्चात् आलमारी में बंद शोध कार्य का कोई औचित्य नहीं होता। ये उद्गार हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग की कुलपति डॉ अरूणा पल्टा ने व्यक्त किये। डॉ पल्टा आज दुर्ग विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी विद्यार्थियों हेतु आवश्यक कोर्स वर्क से संबंधित ऑनलाईन कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर अपने विचार व्यक्त कर रही थीं। उन्होंने शोधकर्ताओं से आह्वान किया कि वे ऑनलाईन कार्यशाला में रूचि लेकर सहभागिता करें। किसी भी शोध कार्य को पूर्ण करने में ईमानदारी एवं समर्पण सफलता के मूल मंत्र है।












