कलम की तरह कुछ झुक कर ही अच्छा लिखा जा सकता है – श्रीलेखाएमजे ग्रुप भिलाई की निदेशक श्रीलेखा विरुलकर ने अपनी हिन्दी प्राध्यापक श्रीमती दवे को याद करते हुए कहा कि उन्होंने अहं पर काबू पाने की सीख दी। वह अंतरराष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता था। हम सभी प्रतिभागी अपना आलेख उनके पास जांचने के लिए लेकर गए। उन्होंने मेरे आलेख में कुछ संशोधन का सुझाव दिया। तब तक मैं हर प्रतियोगिता में अव्वल आती रही थी। मेरे चेहरे से ही शायद उन्होंने भांप लिया कि मुझे टोकाटाकी पसंद नहीं आई। तब उन्होंने समझाया कि कलम भी तभी अच्छे से लिख पाती है जब वह थोड़ी झुकी हो। आज भी जब भी कभी अहंकार काम के आड़े आने लगता है तो उनका चेहरा और उनकी वह मीठी सी आवाज कानों में गूंज उठती है। उनकी इस सीख ने मुझे जिन्दगी में सही फैसले लेने में हमेशा मदद की।












