शिक्षक दिवस पर संडे कैम्पस ने शिक्षकों से जुड़े संस्मरणों को साझा करने का आग्रह किया था। हमें ढेर सारी प्रविष्टियां मिलीं। उनमें से चुनिंदा को यहां प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। पद्मविभूषण डॉ तीजन बाई ने गनियारी (पाटन) स्थित अपने निवास पर शिक्षक दिवस की पूर्व संध्या पर संडे कैम्पस से चर्चा करते हुए कहा कि वे आज जो कुछ भी हैं, अपने गुरू बृजलाल की वजह से हैं। उनके गुरू शायद उनके लिए ही जी रहे थे। शिष्य को अपनी जगह सौंप कर वे इस दुनिया से विदा हो गए। गनियारी के जिस मकान में आज तीजन रहती हैं, वो स्थान कभी उनके गुरू बृजलाल का निवास था। यह स्थान उन्होंने अपने मामाओं से मोल ले लिया। बृजलाल गुरू होने के साथ-साथ उनके नानाजी भी थे।












